जिला ब्यूरो चीफ संदीप दीक्षित 24 क्राइम न्यूज़
अनुसूचित जाति / अनुसूचित जन जातियों के उपवर्गीयकरण आरक्षण सम्बन्धी, माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये फैसले को निरस्त कराये जाने के लिए दिया ज्ञापन बादा -आपको बता दें कि पूरा मामला जिला कलेक्ट्रेट परिसर कार्यालय बांदा का जहां पर भारतीय बौद्ध महासभा उत्तर प्रदेश (पंजीकृत) एवं जनपद शाखा बांदा.इस ज्ञापन पत्र के माध्यम से माँग करते हैं कि परम पूज्य बाबा साहब डा० भीमराव अम्बेडकर द्वारा भारत की अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों को प्रदत्त संवैधानिक अधिकारों-'आरक्षण' पर कुठाराघात करते हुए माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजातियों में केमीलेयर एवं जातीय उपवर्गीकरण कर आरक्षण व्यवस्था करने का दिनांक 01 अगस्त 2024 को फैसला दिया है।
भारतीय संविधान की मूल भावना एवं भारतीय संविधान के अनुच्छेद-341 एवं 16 (4) के विरूद्ध है। माननीय सुप्रीम कोर्ट को अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जन जातियों के पूर्व प्रदत्त आरक्षण में एडिशन डिलीशन एवं मोडिफिकेशन का संविधान प्रदत्त कोई अधिकार भी नहीं है महोदया,"संविधान में आरक्षण की व्यवस्था सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए की गई है, जबकि अभी भी एस०सी०, एस०टी० व आदिवासियों से छुआछूत, ऊँचनीच, जाति भेद, भेदभाव, का दुर्व्यवहार किया जाता है।"
01 अगस्त 2024 को अनुसूचित जातियों / अनुसूचित जनजातियों के आरक्षण के विरुद्ध कीमीलेयर एवं जातीय उपवर्गीयकरण सम्बन्धी माननीय सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है, उससे भारतीय बौद्ध महासभा उत्तर प्रदेश (पंजीकत) सहित लाखों संगठन एवं करोड़ों लोग भयंकर जनाकोश में हैं, जो भारत बन्द जैसे आन्दोलनों की ओर अग्रसर हैं। मांग है कि अनुसूचित जातियों / अनुसूचित जनजातियों के कीमीलेयर एवं जातीय उपवर्गीयकरण सम्बन्धी मा0सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निप्रभावी करने हेतु भारत सरकार की संसद का एक विशेष अधिवेशन बुलाकर 'आरक्षण' पूर्व की भाँति रखे जाने और संविधान की नौवींअनुसूची में शामिल कराये जाने का आदेश जारी किया जाये इस मौके पर डा0 पीएन बौद्ध मंडल अध्यक्ष , ज्ञानेश्वर जिलाध्यक्ष बांदा, सुखलाल बौद्ध पूर्व जिलाध्यक्ष,बच्ची राम , लवलेश,रामचरन , रामसेवक पाल, सहित अन्य लोग मौजूद।
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